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बुधवार, 4 दिसंबर 2019

फरार आरोपी नित्यानंद ने साउथ अमेरिका में एक आईलैंड खरीदा उसे देश घोषित किया

nithyananda latest news

रेप का आरोप लगने के बाद से फरार बाबा नित्यानंद के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया है कि नित्यानंद ने साउथ अमेरिका के एक देश इक्वाडोर से एक आईलैंड खरीदा है। इस आईलैंड को उसने एक आजाद देश घोषित किया है। जिसका नाम कैलास  रखा है। इसके नाम की एक वेबसाइट भी बनाई गई है। . जिसमें कैलास  को हिंदू राष्ट्र बताया गया है। 

कैलाश के वेबसाइट के अनुसार यह आइलैंड त्रिनिदाद और टोबैगो देशों के नजदीक है। इसमें किसी एक देश की तरह तमाम सरकारी पदों पर लोग नियुक्त किए गए हैं। जैसे प्रधानमंत्री,कैबिनेट मंत्री,सेना प्रमुख और अन्य नित्यानंद ने अपने एक करीबी अनुयाई मा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। वेबसाइट पर संविधान और सरकारी ढांचे की जानकारी भी दी गई है। कई सारे मंत्रालय विभाग और एजेंसी बनाने का दावा है।

इतना ही नहीं नित्यानंद ने अपने देश का अलग झंडा भी बनाया है। राष्ट्रीय पशु,राष्ट्रीय पक्षी,राष्ट्रीय फूल और राष्ट्रीय पेड़ जैसी चीजों का ऐलान भी किया है। यह भी ऐलान किया है कि अगर कोई यहां का नागरिक बनना चाहता है। तो वह डोनेशन देकर यहाँ रहने आ सकता है। वेबसाइट में बताया गया है कि कैलास  एक गैर राजनीतिक देश है और मानवता उसका मकसद है।

यह देश हिंदू धर्म की सभ्यता और संस्कृति के अनुसार चलेगा जो कि कई देशों से विलुप्त हो रही है। कैलास  के दो तरह के पासपोर्ट बनाए गए हैं। एक सुनहरे रंग का और दूसरा लाल रंग का है। झंडे का रंग मेहरून है। जिसके दो प्रतीक हैं। एक सिंहासन पर नित्यानंद और दूसरे पर एक नंदी है। अनुयायियों के साथ बलात्कार और बच्चों को अगवा करने का आरोपी नित्यानंद देश छोड़कर भाग चुका है।नित्यानंद को वापस लाने के लिए पुलिस विदेश मंत्रालय के साथ काम कर रही है। देश लौटते ही उसकी गिरफ्तारी के आदेश हैं।

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

अयोध्या में मस्जिद के लिए कोई विकल्प स्वीकार्य नहीं: जमीयत उलमा-ए-हिंद

No option acceptable for mosque in Ayodhya. Jamiat ulama-e-hind

मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक भूमि पर । जमीयत उलमा-ए-हिंद (JuH) ने फैसला नहीं किया है।गुरुवार को दिल्ली में अपनी कार्यसमिति की बैठक में जमीयत उलमा-ए-हिंद (JuH) ने कहा कि मस्जिद के लिए 'विकल्प' के रूप में कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा - चाहे वह पैसा हो या जमीन।JuH ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा के लिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया।

JuH के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि पांच सदस्यीय समिति इस मामले पर कानूनी राय लेगी।बैठक में मौजूद उत्तर प्रदेश जू के अध्यक्ष अशद रशीदी ने कहा "कार्य समिति की बैठक में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। एक मस्जिद के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक भूमि से संबंधित था और दूसरा समीक्षा याचिका से जुड़ा  था ।

रशीदी ने कहा, "कार्य समिति ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि दुनिया में न ही पैसा और न ही जमीन मस्जिद का विकल्प हो सकती है । यह किसी भी मुस्लिम संगठन के लिए सही नहीं होगा।"जमीयत उलमा-ए-हिंद की स्थापना 1919 में हुई थी और यह सबसे प्रभावशाली और आर्थिक रूप से स्थायी मुस्लिम संगठनों में से एक है। इसने खिलाफत आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी।  हालांकि बाद में इसने विभाजन का विरोध किया।

एक अन्य मुस्लिम वादक मोहम्मद उमर ने पहले ही घोषणा की है कि वह एक समीक्षा याचिका दायर करेंगे बशर्ते कि एआईएमपीएलबी उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करे।ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (AIBMAC) के संयोजक और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी पहले ही कह चुके हैं कि वह SC शीर्ष अदालत के साथ 'संतुष्ट नहीं' हैं।