रावण यह नाम सुनते ही लोगों के दिल में जो पहला विचार आता है। वह है सीता हरण। यह एक ऐसी पौराणिक घटना है जिसने एक महाविद्वान और प्रखंड पंडित को एक खलनायक बना दिया। लोग रावण को सीता हरण के लिए याद रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि रावण के बारे में जो बताया गया है या बताया जा रहा है। वह पूरा सच नहीं है।
रावण एक कुशल सेनापति,राजनीतिक,ज्योतिष,वास्तु कला और बहुत सी कलाओं के ज्ञाता था। वह इंद्रजाल,सम्मोहन जैसे तंत्र-मन्त्र के साथ भी बहुत तरह के जादू जानता था। इसलिए उसे मायावी भी कहा जाता था। इन्हीं विधियों की वजह से लोग उससे भयभीत रहते थे। रावण में जितनी बुराइयां थी। उसने उतनी ही अच्छाई भी थी। यही वजह है कि इतनी बुराइयां होने के बाद भी उसके शत्रु तक उसका सम्मान करते थे।
दोस्तों आज हम ऐसी अद्भुत व्यक्ति जो कि एक बहुत खल बड़े खलनायक के रूप में जाना जाता है के बारे में कुछ रोचक बातें आपके साथ शेयर करेंगे। आज हम रावण के बारे में वो रोचक बातों बताएंगे। जो कि बहुत कम लोग या ना के बराबर ही लोग ही जानते हैं।
रावण वीर और अद्भुत योद्धा था
इसमें कोई संदेह नहीं है कि रावण एक वीर योद्धा था। उसकी वीरता की व्याख्या बहुत से पुराण और कथाओं में सुनने को मिलती है। रावण जब भी युद्ध के लिए निकलता था। तब वह अपनी सेना के अगुआई वे खुद सेनापति के बहुत आगे रह कर करता था। बहुत से युद्ध तो उसने अकेले ही जीत लिए थे।रावण ने यमराज को युद्ध में पराजित किया था
एक बार उसने यमपुरी जाकर यमराज को युद्ध के लिए ललकारा और उन्हें युद्ध में हराकर। नर्क में सजा प्राप्त कर रही जीव आत्माओं को वहां से मुक्त करा कर अपनी सेना में शामिल कर लिया। दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इतना वीर और अद्भुत योद्धा होते हुए भी। रावण को कई बार पराजय का सामना करना पड़ा था।भगवान श्री राम के अलावा रावण को कई बार पराजय का सामना करना पड़ा था
भगवान श्री राम ने रावण को हराया था यह तो हर कोई जानता है पर बहुत ही कम लोग हैं जो यह जानते हैं। वानर राज सुग्रीव के भाई बाली के हाथों भी रावण को पराजित और लज्जित होना पड़ा था। बाली बहुत ही शक्तिशाली शक्तिशाली था। वह हर रोज चारों समुंदर की परिक्रमा करके सूर्य को जल अर्पण करता था। एक दिन रावण की ललकार पर क्रोधित होकर उसने रावण को अपनी बाजू में दबाकर चारों समुंदर की परिक्रमा करके सूर्य को जल अर्पण किया था। इसके बाद उन दोनों में मित्रता हो गई थी।
अर्जुन ने रावण को पकड़कर अपना बंदी बना लिया थाइसी प्रकार से सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को पकड़कर अपना बंदी बना लिया था। पौराणिक कथाओं की मानें तो सहस्त्रबाहु अर्जुन बहुत बलशाली था। उसके हजारों हाथ थे। उसने अपने हजारों हाथों से एक बार नर्मदा नदी के जल प्रवाह को रोक दिया था। उस इकट्ठा हुए जल में उसने रावण को उसकी सेना सहित बहा दिया था।
भगवान शिव से युद्ध में हारने के बाद रावण ने उनको अपना गुरु बना लिया
एक बार रावण ने भगवन शिव से युद्ध किया किया।इसी तरह भगवान शिव से युद्ध में हारने के बाद रावण ने उनको अपना गुरु बना लिया था।रावण के विमान और हवाई अड्डे
चलिए बात करते हैं रावण के विमान और हवाई अड्डों की यह तो सभी जानते हैं कि रावण ने कुबेर को हराकर लंका पर अपना राज्य कायम किया था। रावण ने लंका के साथ धनपति कुबेर से उसका अद्भुत विमान जिसे पुष्पक के नाम से जाना जाता है भी छीन लिया था। पुष्पक विमान की निर्माण विधि और उसका रूप ब्रह्मऋषि अंगिरा ने बताई थी। भगवान विश्वकर्मा ने इस अद्भुत विमान का निर्माण किया था। यही वह अद्भुत रचना थी जिस ने उन्हें देव शिल्पी की उपाधि दिलाई।
पुष्पक अपने आप में एक बहुत ही अद्भुत विमान माना जाता है। जो की इच्छा अनुसार गति पर चलता था। इसकी बहुत सी विशेषताओं में से एक यह थी इसे इच्छा अनुसार बड़ा या छोटा किया जा सकता था। इसमें बहुत सारे लोग एक साथ यात्रा कर सकते थे। मन की गति से चलने की क्षमता के कारण इस विमान का स्वामी अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी आ जा सकता था। रावण से जुड़ी चीजों पर बहुत से बहुत सारी एजेंसीज भारत और श्रीलंका में रिसर्च कर रही है। इसी के अंतर्गत श्रीलंका की श्री रामायण रिसर्च कमेटी की रिसर्च के अनुसार रावण के पास चार हवाई अड्डे थे। कमेटी की रिसर्च के अनुसार हनुमान ने लंका दहन के समय उन्हें नष्ट कर दिया था।
रावण द्वारा की गई रचनाएं
रावण द्वारा बहुत सी रचनाएं की गई थी। जिसमें शिव तांडव स्त्रोतम जिसे सुनकर लोगों को एक अद्भुत शांति मिलती है। जिसको शिव आराधना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसकी रचना रावण नहीं की थी। लाल किताब को को मूल रूप से अरुण सहिता के नाम से जाना जाता है। इसे कई भाषाओं में अनुवादित भी किया गया है। मान्यता है कि रावण को यह ज्ञान सूर्य देव के साथ ही अरुण से प्राप्त हुआ था।जिसमें हस्तरेखा,जन्मकुंडली,सामुद्रिक शास्त्र का विस्तृत संयोजन किया गया है। अरुण सहिता को ज्योतिष का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्त्रोत माना जाता है। यह रावण के संपूर्ण जीवन का सार है। यह किताब ज्योतिष से जुड़ी जानकारियों का भंडार है।
रावण एक बहुत बड़ा कला प्रेमी भी था
रावण एक बहुत बड़ा कला प्रेमी भी था। इसका उदाहरण माता सरस्वती के हाथों में स्थित रूद्रवीणा है। जिसका निर्माण रावण ने अपने सर भुजा और धमनियों से किया था। रावण रूद्रवीणा बजाने में भी माहिर था। इसी वजह से भगवान शिव के अनुरोध पर रावण ने चारों वेदों को संगीतबद्ध भी किया था।
कई लोगों की धारणा है कि रावण बहुत ही अहंकारी था। पर यह पूर्णता सत्य नहीं है। आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि रावण एक विनम्र व्यक्ति भी था। इसके कई उदाहरण बहुत सी पौराणिक कथाओं में भी मिल जाते हैं। कहा जाता है कि जब प्रभु श्री राम रामेश्वरम शिवलिंग की स्थापना कर रहे थे। तब उन्हें कोई विद्वान पंडित नहीं मिल रहा था। तो उन्होंने रावण को पूजा कराने का आमंत्रण दिया। एक ब्राह्मण और शिव भक्त होने के नाते रावण ने ना उनका आमंत्रण स्वीकार किया और बल्कि श्री राम की विजय की कामना भी की।
ऐसी ही एक और मान्यता है कि जब मेघनाथ के हाथों शक्ति लगने से लक्ष्मण घायल हो गए थे और उनके उपचार के लिए आयुर्वेदाचार्य द्वारा अनुमति मांगने पर रावण ने उन्हें शस्त्र अनुमति दे दी थी। परंतु इस घटना के समर्थन में कोई भी प्रमाण ना होने की वजह से लोग इसे एक मिथक मानते हैं। यही वजह है कि रावण द्वारा सीता को कभी ना स्पर्श करने के पीछे रावण को मिले सब श्राप को कारण माना जाता है। ना कि उसके विनम्र व्यक्तित्व को।
लोग रावण को बस एक खलनायक के रूप में जानते हैं। क्योंकि बहुत ही कथाओं और आजकल चल रहे पौराणिक धारावाहिकों में भी रावण को एक खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पर यह पूरा सत्य नहीं है। वह जितना बुरा था उतना ही ज्ञानी और विनम्र भी था। दोस्तों आप रावण के बारे में क्या सोचते हैं हमें कमेंट में जरूर बताइए।
