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मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

रावण एक कुशल राजा होने के साथ-साथ हर क्षेत्र में भी अव्वल था

ravan was a great king

रावण का नाम सुनते ही हमारे मन में एक क्रूर राजा एक अहंकारी व्यक्ति और एक असुर और सब कुछ तुच्छ समझने वाले एक घमंडी इंसान की छवि उभरती है। लेकिन में से बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रावण सर्वशक्तिशाली,एक कुशल राजा ,अत्यंत बुद्धिजीवी और अपने परिवार की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकने वाला एक भगवान शिव का एक असीम भक्त था।  दोस्तों आज की इस पोस्ट में आप रावण के बारे में वह रोचक बातें भी जानेंगे।

दोस्तों इस बात का रामायण में कहीं पर भी जिक्र नहीं है कि रावण के वध के बाद उसके शरीर का क्या किया गया। क्या रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी को शाम गुफा में सुरक्षित रखा गया है या या नहीं। क्या आपको पता है कि रावण बचपन से ही ना ही एक ब्राह्मण और ना ही एक राक्षस था वह ऋषि विश्रवा का पुत्र था। जो कि एक विद्वान ब्राह्मण थे।जबकि उनकी मां के किसी ऋषि विश्रवा की दूसरी पत्नी थी और वह राक्षस प्रजाति की थी। रावण की माँ क्षत्रिय राक्षसनी थी। जिनको ब्रह्मराक्षसनी  के नाम से भी जाना जाता है। यही कारण था कि बचपन से ही रावण के पास राक्षस जैसी शक्ति और ब्राह्मण जैसी बुद्धि विद्यमान थी।

रावण एक कुशल राजा होने के साथ-साथ हर क्षेत्र में भी अव्वल था

रावण के समय में हवाई अड्डे और अत्याधुनिक विमान हुआ करते थे
हवाई अड्डे और अत्याधुनिक विमान हुआ करते थे। क्या आपको पता है कि रावण एक कुशल राजा होने के साथ-साथ हर  क्षेत्र में भी अव्वल था। जिस समय भारत के राजा और बड़े-बड़े योद्धाओं को विमान के बारे में पता तक नहीं था। उस समय रावण के शासनकाल में चार चार  हवाई अड्डे और अत्यधिक आधुनिक विमान हुआ करते थे। आज भी श्रीलंका में ऐसे हवाई अड्डे हैं। जिनको श्रीलंकाई सरकार के द्वारा कहा जाता है कि रावण ने इन्हें इस्तेमाल किया था।
रावण एक कुशल रक्षाविशेषज्ञ भी था
 रावण सिर्फ तकनीकी क्षेत्र में भी एडवांस नहीं था बल्कि वह एक कुशल रक्षा विशेषज्ञ था और इसका प्रमाण हमें खुद रामायण में भी मिलता है। रावण ने श्रीलंका को चारों तरफ से ऐसे सुरक्षा घेरे से घेरे हुआ था कि जन साधारण तो छोड़िए हनुमान जैसे पुरुष को भी श्री लंका पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
रावण को इतिहास का सबसे बुद्धिमान ब्राह्मण माना जाता है
रावण को इतिहास का सबसे बुद्धिमान ब्राह्मण माना जाता है। कहा जाता है कि रावण एक बार किसी भी चीज को पढ़ने के बाद हमेशा के लिए ही उसे याद रख सकता था। फिर वह चाहे जटिल संस्कृत के श्लोक हो या फिर प्राचीन पौराणिक ग्रंथ। यही कारण है कि रावण के द्वारा बहुत से बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना भी की गई है.
बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना रावण द्वारा ही की गई  है 
 रावण के द्वारा बहुत से बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना भी की गई है। जिसमें शिव तांडव स्त्रोतम जिसको शिव आराधना का एक अद्भुत हिस्सा माना जाता है।  आपने कभी न कभी लाल किताब के बारे में जरूर सुना होगा। लाल किताब में कुंडली,हस्तरेखा और भी ज्योतिष से जुडी बाते है। आपको बता दे ज्योतिष का आधार इस लाल किताब की रचना भी रावण ने ही की थी।
रावण एक  निडर व्यक्तित्व वाला एक कुशल राजा था
रावण एक निडर व्यक्तित्व वाला एक कुशल राजा था और उसकी कुशलता का प्रमाण खुद प्राचीन श्रीलंकन ग्रंथ देते हैं। आपको जानकर यह हैरानी होंगी कि श्रीलंका के पूरे ही इतिहास में सबसे कुशल और बुद्धिमान राजा रावण को ही माना जाता है। रावण के इसी काल में श्रीलंकन प्रजा सबसे ज्यादा समृद्ध और खुशहाल रही थी और सबसे बड़ा कारण यही है कि श्रीलंका के इस राजा को यहां की प्रजा भगवान स्वरूप पूजती है
क्या आपको पता है कि रावण कला में भी माहिर था 
क्या आपको पता है कि रावण कला में भी माहिर था और इसका प्रमाण माता सरस्वती के हाथों में स्थित रूद्रवीणा है। जिसका निर्माण रावण ने अपने सिर,भुजा और धमनियो से ही किया था। रावण रूद्र वीणा बजाने में भी माहिर था। इसलिए  भगवान शिव के अनुरोध पर रावण ने चारो वेदों को संगीतबद्ध किया था।
रावण को रावण का नाम भगवान शिव ने ही दिया था 
पुरानी कथाओं में बताया जाता है कि एक बार रावण भगवान शिव को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था। लेकिन शिवजी राजी नहीं हो रहे थे। तो उसने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया। जिसे देखकर शिव जी ने अपना पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया। जिसकी वजह से  रावण की उंगली दब गई। रावण उंगली दबने  के बाद  वहाँ तेज-तेज आवाज में  शिव तांडव करने लगा। शिव जी यह देखकर बहुत ही आश्चर्य चकित रह गए कि एक व्यक्ति इतने दर्द में भी शिव तांडव कैसे कर सकता है और उसी क्षण शिव जी ने रावण को रावण का नाम दिया जिसका अर्थ होता है तेज तेज आवाज में दहाड़ना।
रावण सर्वशक्तिशाली भी था
रावण सर्वशक्तिशाली भी था। जिसका परिणाम हमें इस बात से लगता है कि रावण तीनों ही लोकों का स्वामी था। उसने न केवल इंदरलोक बल्कि भू लोंक के  भी बड़े-बड़े हिस्सों को अपने असुरों की ताकत से कब्जा किया था। रावण सदैव ही एक वीर योद्धा की तरह अपनी सेना की अगुवाई किया करता था और बहुत से युद्ध  तो उसने बिना सेना के अपने दम पर ही जीत लिए थे।
यमराज को भी रावण से हार का सामना करना पड़ा था
यहां तक कि रावण ने यमपुरी जाकर यमराज को युद्ध के लिए ललकारा और उन्हें हराया भी और नर्क में सजा पा रही जीव आत्माओं को आजाद करा कर अपनी सेना में भर्ती कर लिया।
शनि देव को रावण ने बनाया बंदी 
 माना यह जाता है कि जब उसके पुत्र मेघनाथ का जन्म हुआ। तो रावण ने सभी ग्रहो   को 11 वे स्थान पर रहने के लिए कहा ताकि उसके पुत्र को अमरता मिल सके। लेकिन शनि  महाराज 11 वे स्थान की वजह 12वें स्थान पर जाकर विराज मान हो गए।  रावण इस घटना से इतना क्रोधित हुआ कि उसने शनिदेव पर ही आक्रमण कर दिया। यह भी कहा जाता है कि कुछ समय तक उसने भगवान शनिदेव को भी अपना बंदी बना लिया था।
रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी था
रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी था। जहां उसने अपनी बहन सूर्पनखा के अपमान का बदला लेने के लिए वह कदम उठाया जो आगे चलकर उसके विनाश का कारण बना।  वहीं दूसरी तरफ अपनी पत्नी को बचाने के लिए वह उस यज्ञ से उठ गया। जिस यज्ञ से. भगवान श्रीराम की पूरी ही सेना को तबाह कर सकता था इसके अलावा जब कुंभकरण को ब्रह्मा जी ने हमेशा नींद में सोने का वरदान दिया था। तब रावण ने दोबारा से  तपस्या करके उसी अवधि को 6 महीने कराया था। जिससे पता चलता है कि रावण अपने भाई बहनों और पति पत्नी की कितनी फिक्र करता था।

भारत के कई हिस्सों में भी की जाती है रावण की पूजा 

आपको जानकर यह हैरानी होंगी कि श्रीलंका के पूरे ही इतिहास में सबसे कुशल और बुद्धिमान राजा रावण को ही माना जाता है। रावण के इसी काल में श्रीलंकन प्रजा सबसे ज्यादा समृद्ध और खुशहाल रही थी और सबसे बड़ा कारण यही है कि श्रीलंका के इस राजा को यहां की प्रजा भगवान स्वरूप पूजती थी ।
आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन रावण की पूजा सिर्फ श्रीलंका में नहीं कही जाती है। बल्कि भारत में भी की जाती है। दक्षिण भारत व दक्षिण पूर्वी भारत के हिस्सों में रावण की पूजा की जाती है। कानपुर का कैलाश मंदिर साल में एक बार ही दशहरे के दिन ही खुलता है। जहां पर रावण की पूजा की जाती है।  सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश राजस्थान और भारत के कई हिस्सों में रावण की विधिवत पूजा की जाती है।

रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी को शाम गुफा में सुरक्षित है

दरअसल श्रीलंका के लोग अपने पूर्वजों से यह बातें सुनते हुए आए हैं कि रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी गुफा में रखा गया है। वहां के लोग मानते हैं कि रावण के वध के बाद नाग जाति के लोगों ने रावण को कई विधियों से जीवित करने का प्रयास किया था। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तो वह लोग रावण का शरीर उठाकर ले गए और उसके शरीर पर जड़ी बूटियों का लेप लगाकर एक ताबूत में सुरक्षित रखकर उस ताबूत को किसी को गुफा में छुपा दिया। उनको यह उम्मीद थी कि जब  लक्ष्मण को संजीवनी बूटी से दोबारा जीवित किया जा सकता है। तो रावण को भी किया जा सकता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि श्रीलंका की रिसर्च टीम भी मानती है कि रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के घने जंगलों में एक ताबूत में रखा गया है। श्रीलंका में कोलंबो से 220 किलोमीटर एक  जगह रंगला में इस ताबूत के होने का दावा किया गया है।

बाद में श्रीलंका सरकार की रिसर्च टीम ने कई बार उस गुफा तक पहुंचने की कोशिश की  लेकिन हर बार वह असफल रहे। कई कोशिश के बाद फाइनली उनको जंगल में गुफा का नेटवर्क मिला और उन सभी गुफाओ  में से एक गुफा में उनको 18 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा पत्थर का एक ताबूत भी मिला। जांच के बाद पाया गया कि उस पत्थर पर एक विशेष प्रकार का लेप लगा हुआ है। इस ताबूत को खोलने की इजाजत तो वहां की सरकार ने किसी को नहीं दी।

क्योंकि यह एक सुरक्षा का मामला था। दरअसल इस गुफा की बनावट ऐसी थी कि यहां का एक भी पत्थर अगर हिल जाता।  तो बड़ा हादसा हो सकता है इसलिए इस ताबूत को आज तक बाहर निकालने और खोलने की इजाजत किसी को नहीं मिली। श्रीलंका के केंद्रीय मंत्री ने भी एक इंटरव्यू में इस बात को स्वीकार किया था। इस बात पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन जब एक सरकार ही  ऐसे दावे करे तो वास्तव में यह बात सोचने पर मजबूर करती है।